केरल सीएम पिनाराई विजयन की बेटी पर रिश्वत कांड का साया, पिता की कुर्सी पर संकट के बादल



 केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनकी बेटी वीणा टी पर कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े रिश्वत मामले में गंभीर आरोप लगे हैं। सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने कोच्चि की विशेष अदालत में वीणा टी के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है, जिसमें 2.7 करोड़ रुपये के कथित फर्जी लेनदेन का जिक्र है। इस मामले ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि विजयन की साख और कुर्सी पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।  


क्या है पूरा मामला? 

एसएफआईओ की जांच में दावा किया गया है कि वीणा टी को कोच्चि स्थित सीएमआरएल से नियमित रूप से मासिक भुगतान प्राप्त हो रहा था। यह राशि कथित तौर पर फर्जी लेनदेन के जरिए हासिल की गई। आरोप-पत्र में सीएमआरएल के प्रबंध निदेशक शशिधरन कार्था, निदेशक अनिल आनंदा पणिक्कर, मुख्य वित्तीय अधिकारी सुरेश कुमार, मुख्य महाप्रबंधक पी. सुरेश कुमार, वैधानिक लेखा परीक्षक सागेश कुमार केए और मुरलीकृष्णन एके सहित कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा मामला कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का एक जटिल जाल है, जिसके तार मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के संकेत दे रहे हैं।  


विपक्ष का हमला, इस्तीफे की मांग  

इस खुलासे के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री पर हमला तेज कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि ये संदिग्ध सौदे न केवल वीणा टी को फायदा पहुंचाने के लिए थे, बल्कि इसके जरिए विजयन को भी अवैध लाभ मिला। दोनों पार्टियों ने इस मामले को लेकर विजयन के इस्तीफे की मांग की है और इसे "सत्ता के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण" करार दिया है।  


कानूनी दांवपेच और सजा का खतरा  

एसएफआईओ, जो कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, ने इस मामले में ठोस सबूत पेश किए हैं। दूसरी ओर, सीएमआरएल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जांच पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर वीणा टी और अन्य आरोपी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें न्यूनतम छह महीने से लेकर अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा, धोखाधड़ी की राशि से तीन गुना तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि कोर्ट को यह लगता है कि इस मामले में जनहित प्रभावित हुआ है, तो न्यूनतम सजा तीन साल तक बढ़ सकती है।  


सियासी भूचाल की आहट

यह मामला न सिर्फ कानूनी दायरे में उलझा हुआ है, बल्कि केरल की सियासत में भी भूचाल लाने की क्षमता रखता है। विजयन, जो अपनी सख्त छवि और प्रशासनिक कुशलता के लिए जाने जाते हैं, अब इस घोटाले के चलते विपक्ष के निशाने पर हैं। सवाल यह है कि क्या यह कांड उनकी कुर्सी को डिगा पाएगा, या वे इस संकट से उबरने में कामयाब होंगे? फिलहाल, कोर्ट और जनता की नजरें इस मामले के अगले मोड़ पर टिकी हैं।

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